सीमा समाचारिका

ग्नाथंग : पर्वत, परंपरा और सीमा का संगम

ग्नाथंग : सीमा के सिल्क रूट पर भारत का प्रथम गाँव पूर्वोत्तर का अनमोल रत्न और हिमालय की गोद में खिला पहाड़ों का फूल सिक्किम के पूर्वी छोर पर, 13,500 फीट की विराट ऊँचाई पर अवस्थित सीमांत ग्राम ग्नाथंग भारत का वह प्रथम घर है, जहाँ सूर्यदेव अपनी स्वर्णिम रश्मियों से सबसे पहले धरती का…

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सीमा-सुदृढ़ता और ऑपरेशन ‘मेघना’ हेलि़ड्रॉप

ऑपरेशन मेघना हेलिड्रॉप : भारत की सीमाओं को अजेय बनानेवाली विजय 9 दिसंबर 1971, रात 23:30 बजे – जब पूर्वी पाकिस्तान की भूमि पाकिस्तान से आजादी के लिए कराह रही थी, आर्तनाद कर रही थी, तब भारत का आकाश गर्जन कर उठा। यह न तो मंद गूँज थी, न ही सामान्य युद्ध-घोष। यह था भारत…

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16 दिसंबर: राष्ट्र-प्रतिष्ठा का अमर पर्व

विजय दिवस: भारत के पौरुष का महानुष्ठान 16 दिसंबर केवल तिथि नहीं है, यह भारत के पौरुष की प्रतिज्ञा का उदय-दिवस है। यह वह क्षण है जब इतिहास ने भारतमाता के मस्तक पर विजय का रक्ताभ तिलक अंकित होते देखा। उस दिन सूर्य पश्चिम से नहीं, सीमाओं से उग रहा था – जहाँ भारतीय सैनिकों…

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जब भारत खड़ा हुआ, पाकिस्तान टूट गया

1971 में पाकिस्तान का विभाजन : भारत के लिए एक रणनीतिक वरदान 16 दिसंबर 1971 को जब 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने अपनी बंदूकें डाल दीं, तब केवल एक सैन्य विजय हुई नहीं। हुआ था भारत के भविष्य का संरचनात्मक पुनर्निर्माण, जिसके सुदूरगामी परिणाम इस चौथाई सदी में भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था,…

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फील्ड मार्शल मानेकशॉ की शौर्य-गाथा

सैम बहादुर: जिनके निर्णयों ने बदल दिया इतिहास का भूगोल शस्त्र उठा, शौर्य जगा, जयघोष गगन में छाया, जहाँ डटे सैम बहादुर, वहाँ विजयी ध्वज लहराया!” आज हम उस महानायक का स्मरण कर रहे हैं, जिसकी मुस्कान में आत्मविश्वास का वसंत था, और वाणी में तर्क का वज्र। जिसके नेत्रों में रण-चंडी का तेज था,…

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‘धुरंधर’: राष्ट्र-चेतना का शंखनाद

  ‘धुरंधर’: नैरेटिव के मोर्चे पर भारत की सांस्कृतिक स्वाधीनता सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, एक वैचारिक अस्त्र है। जिसे हम ‘सॉफ्ट पावर’ कहते हैं, उसका सबसे प्रभावी माध्यम है सिनेमा। लेकिन दशकों तक भारतीय सिनेमा ने इस शक्ति का उपयोग भारत की ही जड़ों को खोदने में किया। महर्षि अरविन्द ने जिसे ‘चिन्मय शक्ति’ कहा…

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