सीमा समाचारिका

मलारी– हिमालय की तपस्वी भूमि

मलारी: हिमालयी सीमांत पर भारत का अडिग प्रहरी उत्तराखंड के चमोली जिले में, धौली गंगा घाटी के कंधे पर जहाँ बर्फीली चोटियाँ तिब्बत सीमा पर निरंतर पहरेदारी करती हैं, वहाँ दस हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित मलारी गाँव अविचल सूरमा की तरह खड़ा है। यह गाँव न केवल एक एक महत्वपूर्ण भौगोलिक गाँव है,…

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लहरों के बीच अंडमान,लक्षद्वीप 

द्वीपों की सीमा-संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता नक्शों की रेखाओं से राष्ट्र नहीं बनते; राष्ट्र बनते हैं संकल्प से। भारत की सीमाएँ वही संकल्प हैं, जिन्हें इतिहास ने तपाया है और बलिदान ने अमर किया है। ये तो राष्ट्र–देह की वह प्रथम–दृश्यमान त्वचा है, जो किसी जीवंत शरीर की बाह्य-सीमा होती है। इससे परे सीमा का…

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ग्नाथंग : पर्वत, परंपरा और सीमा का संगम

ग्नाथंग : सीमा के सिल्क रूट पर भारत का प्रथम गाँव पूर्वोत्तर का अनमोल रत्न और हिमालय की गोद में खिला पहाड़ों का फूल सिक्किम के पूर्वी छोर पर, 13,500 फीट की विराट ऊँचाई पर अवस्थित सीमांत ग्राम ग्नाथंग भारत का वह प्रथम घर है, जहाँ सूर्यदेव अपनी स्वर्णिम रश्मियों से सबसे पहले धरती का…

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सीमा-सुदृढ़ता और ऑपरेशन ‘मेघना’ हेलि़ड्रॉप

ऑपरेशन मेघना हेलिड्रॉप : भारत की सीमाओं को अजेय बनानेवाली विजय 9 दिसंबर 1971, रात 23:30 बजे – जब पूर्वी पाकिस्तान की भूमि पाकिस्तान से आजादी के लिए कराह रही थी, आर्तनाद कर रही थी, तब भारत का आकाश गर्जन कर उठा। यह न तो मंद गूँज थी, न ही सामान्य युद्ध-घोष। यह था भारत…

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16 दिसंबर: राष्ट्र-प्रतिष्ठा का अमर पर्व

विजय दिवस: भारत के पौरुष का महानुष्ठान 16 दिसंबर केवल तिथि नहीं है, यह भारत के पौरुष की प्रतिज्ञा का उदय-दिवस है। यह वह क्षण है जब इतिहास ने भारतमाता के मस्तक पर विजय का रक्ताभ तिलक अंकित होते देखा। उस दिन सूर्य पश्चिम से नहीं, सीमाओं से उग रहा था – जहाँ भारतीय सैनिकों…

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जब भारत खड़ा हुआ, पाकिस्तान टूट गया

1971 में पाकिस्तान का विभाजन : भारत के लिए एक रणनीतिक वरदान 16 दिसंबर 1971 को जब 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने अपनी बंदूकें डाल दीं, तब केवल एक सैन्य विजय हुई नहीं। हुआ था भारत के भविष्य का संरचनात्मक पुनर्निर्माण, जिसके सुदूरगामी परिणाम इस चौथाई सदी में भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था,…

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