विशद विमर्शसीमा समाचारिका

सोमनाथ मंदिर – विरासत, विध्वंस और पुनर्स्थापन

सोमनाथ: सीमा, सभ्यता और स्वाभिमान की सहस्राब्दी   – भोगेन्द्र पाठक सोमनाथ भारतीय सभ्यता की वह चेतना-धुरी है जिसके चारों ओर इतिहास की आँधियाँ घूमती रहीं, किंतु जिसकी ज्वाला कभी मंद नहीं पड़ी। सोमनाथ का नाम लेते ही भारतीय चेतना के अतल-पृष्ठों पर एक दीर्घ स्मृति-ज्योति प्रज्वलित हो उठती है, जैसे आदिगुरु शिव की ध्यान–निमीलित दृष्टि…

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सीमा समाचारिका

सावलकोट: चिनाब की लहरों में नई ऊर्जा

सावलकोट: सीमा-चेतना और आत्मनिर्भरता का विद्युत-स्तंभ जिन पर्वत शृंखलाओं ने बरसों से बर्फ और बादल का बोझ सहा है, वहीं अब विकास का सूर्योदय फूट रहा है। चिनाब की अनवरत धारा जो पीढ़ियों से सीमांत जन-जीवन को पालती आई है। वहीं आज सावलकोट में ऊर्जा का नया ज्वालामुखी बनकर फूट रही है। 1856 मेगावाट की…

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सीमा समाचारिका

सुचेतगढ़: भारत राष्ट्र की गर्जना

सुचेतगढ़: भारत का प्रथम गाँव जहाँ सीमा राष्ट्र की आत्मा है पाकिस्तान के सीमांत द्वार जम्मू की पवित्र धरती पर एक छोटा-सा गाँव सगर्व खड़ा है- नाम है सुचेतगढ़। यह केवल एक पता नहीं, एक पहचान है। केवल एक ग्राम नहीं, भारत की प्रथम राष्ट्र-धारणा है। आर.एस.पुरा की तहसील में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर यह अतुल्य…

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सीमा समाचारिका

गुंजी- त्रि-सीमा पर भारत की सजग आत्मा

गुंजी -तकनीक से सुरक्षा, संकल्प से संप्रभुता गुंजी – यह नाम ही एक सुर है। पिथौरागढ़ का यह छोटा-सा ग्राम है जहाँ आकाश पृथ्वी को चूमता है और यहाँ भारत की सीमा केवल राजनीति नहीं, आत्मा बन गई है। भारत-नेपाल-तिब्बत की त्रिवेदी पर अवस्थित यह ग्राम मानचित्र से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है। दस हज़ार पाँच…

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विशद विमर्शसीमा समाचारिका

रक्षा शक्ति को नई धार

  79,000 करोड़ का भारत का संकल्प राष्ट्र भारत आज एक अभूतपूर्व सुरक्षा परिस्थिति का सामना कर रहा है। उत्तर में हिमालय की सर्वोच्च चोटियों से लेकर बांग्लादेश की समतल सीमाओं तक, और पश्चिमी मरुस्थलों से पूर्वी वनक्षेत्रों तक –  भारत की 15,106 किलोमीटर की सीमाएँ अनेक सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही हैं। पाकिस्तान…

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सीमा समाचारिका

किबिथू: भारत का प्रथम ग्राम

  किबिथू- भारत का प्रथम गाँव, जहाँ सीमाएँ और नदियाँ मिलती हैं जहाँ हिमालय की सर्वोच्च शिखरमालाएँ नीलाकाश का आलिंगन करती हैं, और भारत की सीमांत भूमियाँ हिमनदों से प्रवाहित सरिताओं के सहारे विश्व की भौगोलिक सीमाओं का विधान रचती हैं – वहीं एक ऐसा ग्राम स्थित है जो भारतीय राष्ट्रचेतना का अंतिम दीप-शिखर बनकर…

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