सीमा समाचारिका

चिकेन नेक और पूर्वोत्तर का भविष्य

चिकन नेक की छाया में भारत के पूर्वोत्तर का भविष्य   भारत राष्ट्र की सीमा केवल भौगोलिक सीमा नहीं, वह सभ्यता की भी सीमा है, क्योंकि भारतीय सीमाओं के भीतर और भारतीय सीमाओं के बाहर पाकिस्तान और बांग्लादेश में सभायता-संस्कृति का आमूल विभेद व्याप्त है। । जब सीमांत-सुरक्षा शिथिल होती है, जब विश्वास टूटता है,…

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चिकन नेक पर कड़ा सुरक्षा घेरा

चिकन नेक पर चौकसी: सिलीगुड़ी कॉरिडोर के इर्द-गिर्द भारत का नया सुरक्षा कवच भारत अपनी सबसे संवेदनशील और रणनीतिक जीवनरेखा सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के चारों ओर सुरक्षा घेरा कसने जा रहा है। पूर्वोत्तर भारत को शेष देश से जोड़ने वाला यह महज़ 22 किलोमीटर चौड़ा गलियारा केवल भौगोलिक संपर्क नहीं, बल्कि भारत की सामरिक…

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सब्रूम– सीमा के साँचे में रचा जीवन

सब्रूम: भारत-बांग्लादेश सीमा पर इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र-चेतना का संगम आज आपको लिए चलते हैं भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित त्रिपुरा राज्य के दक्षिणी छोर में बसे एक सुंदर, सजीव और संवेदनशील कस्बे सब्रूम की ओर। यह कोई साधारण सीमावर्ती नगर नहीं है; यहाँ का पूरा सामाजिक जीवन सीमा के साँचे में ढला हुआ है। दक्षिण…

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मलारी– हिमालय की तपस्वी भूमि

मलारी: हिमालयी सीमांत पर भारत का अडिग प्रहरी उत्तराखंड के चमोली जिले में, धौली गंगा घाटी के कंधे पर जहाँ बर्फीली चोटियाँ तिब्बत सीमा पर निरंतर पहरेदारी करती हैं, वहाँ दस हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित मलारी गाँव अविचल सूरमा की तरह खड़ा है। यह गाँव न केवल एक एक महत्वपूर्ण भौगोलिक गाँव है,…

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लहरों के बीच अंडमान,लक्षद्वीप 

द्वीपों की सीमा-संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता नक्शों की रेखाओं से राष्ट्र नहीं बनते; राष्ट्र बनते हैं संकल्प से। भारत की सीमाएँ वही संकल्प हैं, जिन्हें इतिहास ने तपाया है और बलिदान ने अमर किया है। ये तो राष्ट्र–देह की वह प्रथम–दृश्यमान त्वचा है, जो किसी जीवंत शरीर की बाह्य-सीमा होती है। इससे परे सीमा का…

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ग्नाथंग : पर्वत, परंपरा और सीमा का संगम

ग्नाथंग : सीमा के सिल्क रूट पर भारत का प्रथम गाँव पूर्वोत्तर का अनमोल रत्न और हिमालय की गोद में खिला पहाड़ों का फूल सिक्किम के पूर्वी छोर पर, 13,500 फीट की विराट ऊँचाई पर अवस्थित सीमांत ग्राम ग्नाथंग भारत का वह प्रथम घर है, जहाँ सूर्यदेव अपनी स्वर्णिम रश्मियों से सबसे पहले धरती का…

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