सीमा-दृष्टि महारानी लक्ष्मीबाई

मां भारती की वीर पुत्री की जयंती

जिसने शौर्य को इतिहास में दर्ज कर दिया- रानी लक्ष्मीबाई भारत के ऐतिहासिक आकाश में नारी–शौर्य के अनेक सूर्य उदित हुए, पर रानी लक्ष्मीबाई की उदीप्ति तो मातृभूमि के माथे पर  अविचल वीरता का कुमकुम–चिह्न बनकर चमकी – एक ऐसी राष्ट्रात्मा के रूप में जो पीढ़ियों को संकल्प और स्वाभिमान का संदेश दे रही हैं।…

Read article
विशद विमर्श

अवैध प्रवासन और स्लीपर सेल्स

मूक विध्वंसकः अवैध प्रवासन और स्लीपर सेल्स – ले. जन. (रि.) डॉ. नितिन कोहली,अध्यक्ष, सीमा जागरण मंच, दिल्ली प्रांत भारत का विशाल भू-भाग, उसकी विस्तीर्ण सीमाएँ और विविध सांस्कृतिक विरासत एक अद्भुत संगम के समान हैं, जहाँ अनेक रंगों, भाषाओं और परंपराओं का मिलन हुआ है। इस पावन भूमि की सीमाएँ केवल भौतिक रेखाएँ नहीं,…

Read article
सीमा-दृष्टि

वन्दे मातरम् – एक आध्यात्मिक शक्ति

वन्दे मातरम् – भारत की सुरक्षा की आध्यात्मिक शक्ति 7 नवंबर, 1975 की पवित्र बेला में, जब ब्रिटिश साम्राज्य की तुगलकी फरमान ‘गॉड सेव द क्वीन‘ भारतीय मस्तकों पर विदेशी पराधीनता की मुहर लगा रहा था, तब बंकिम चन्द्र चटर्जी की दिव्य कलम से निकला वह अमर नाद: ‘वन्दे मातरम्’। यह केवल गीत नहीं था,…

Read article
विशद विमर्श

सीमाएं टूटीं तो टूटे मंदिर

  सीमाएं टूटीं तो टूटे मंदिर – भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार सीमाएँ किसी राष्ट्र की संप्रभुता की परिभाषा हैं। ये केवल भौगोलिक विभाजन नहीं हैं, बल्कि देश के अस्तित्व, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रतीक हैं। एक सुरक्षित सीमा के अभाव में राष्ट्र अपनी सार्वभौमिकता खो देता है। सीमा सुरक्षा में कोई समझौता राष्ट्रीय…

Read article
सीमा-दृष्टि

वन्दे मातरम् में रस, छंद और अलंकार

वन्दे मातरम् में रस, छंद और अलंकार का संगम महान राष्ट्रकवि बंकिम चंन्द्र चटर्जी का ‘वन्दे मातरम्’ केवल एक राष्ट्रगीत नहीं है। यह भारतीय चेतना की वह काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें भाषा, भावानुभूति और भौगोलिक यथार्थता एक अभूतपूर्व सामंजस्य हुआ है। इस कृति की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बंकिम ने संस्कृत के तत्सम…

Read article
विशद विमर्श

सीमा सुरक्षा का आह्वान

भारत की सीमाओं को सुरक्षित करने में आपकी भूमिका:हर भारतीय को आह्वान   लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम (सेवानिवृत्त) राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद्   प्रिय साथी नागरिकों, भारत की सीमाएं केवल मानचित्र पर खींची गई रेखाएं नहीं हैं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय पहचान, एकता और गौरव के जीवंत किनारे…

Read article