सीमा समाचारिका

किबिथू: भारत का प्रथम ग्राम

  किबिथू- भारत का प्रथम गाँव, जहाँ सीमाएँ और नदियाँ मिलती हैं जहाँ हिमालय की सर्वोच्च शिखरमालाएँ नीलाकाश का आलिंगन करती हैं, और भारत की सीमांत भूमियाँ हिमनदों से प्रवाहित सरिताओं के सहारे विश्व की भौगोलिक सीमाओं का विधान रचती हैं – वहीं एक ऐसा ग्राम स्थित है जो भारतीय राष्ट्रचेतना का अंतिम दीप-शिखर बनकर…

Read article
सीमा समाचारिका

गाँव–गाँव संवाद: राष्ट्र–रक्षा का संकल्प

राष्ट्रीय चेतना और सामूहिक दायित्व का शंखनाद  सीमा जागरण का अभिनव आयोजन: उत्तरकाशी की सीमावर्ती गाँवों में संगोष्ठी उत्तरकाशी जनपद के भटवाड़ी प्रखंड की सीमांत धरती पर हाल ही में एक सार्थक वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जहाँ सीमा जागरण मंच ने सीमावर्ती ग्रामों के जन-जीवन से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया। हिमालय की शांत, किंतु…

Read article
सीमा समाचारिका

भारत का सुरक्षा विवेक

सरहद पर सतर्कता: राष्ट्र-रक्षा की संरचना भारत की सीमा आज वह नहीं है जो महाभारत के समय में थी। तब सेनापति सीमा पर सतर्क रहते थे – सशस्त्र, सजग, अपराध के आने के बाद प्रतिक्रिया करने के लिए तैयार। परंतु आज, राष्ट्रीय सुरक्षा और सुरक्षा दर्शन रूपांतरित हो गए हैं। यह न केवल प्रतिक्रिया का…

Read article
सीमा समाचारिका

हिमालय का प्रथम गाँव करज़ोक

करज़ोक: हिमालय की छाती पर भारत का पहला गाँव हिमालय के निस्तब्ध आकाश के नीचे, जहाँ हवा प्रार्थना-ध्वजाओं से संवाद करती है, वहीं त्सो मोरीरी झील के किनारे बसा है करज़ोक, यह केवल एक गाँव नहीं, बल्कि सीमांत पर खड़े उस राष्ट्रभाव का नाम है, जो प्रतिकूल परिस्थियों में भी मुस्कुराता है और भविष्य की…

Read article
सीमा समाचारिका

चिकेन नेक और पूर्वोत्तर का भविष्य

चिकन नेक की छाया में भारत के पूर्वोत्तर का भविष्य   भारत राष्ट्र की सीमा केवल भौगोलिक सीमा नहीं, वह सभ्यता की भी सीमा है, क्योंकि भारतीय सीमाओं के भीतर और भारतीय सीमाओं के बाहर पाकिस्तान और बांग्लादेश में सभायता-संस्कृति का आमूल विभेद व्याप्त है। । जब सीमांत-सुरक्षा शिथिल होती है, जब विश्वास टूटता है,…

Read article
सीमा समाचारिका

चिकन नेक पर कड़ा सुरक्षा घेरा

चिकन नेक पर चौकसी: सिलीगुड़ी कॉरिडोर के इर्द-गिर्द भारत का नया सुरक्षा कवच भारत अपनी सबसे संवेदनशील और रणनीतिक जीवनरेखा सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के चारों ओर सुरक्षा घेरा कसने जा रहा है। पूर्वोत्तर भारत को शेष देश से जोड़ने वाला यह महज़ 22 किलोमीटर चौड़ा गलियारा केवल भौगोलिक संपर्क नहीं, बल्कि भारत की सामरिक…

Read article